अध्ययन मार्गदर्शिकाएँ

JEE Main में AIR, कैटेगरी रैंक और बराबर स्कोर

JEE Main के इंजीनियरिंग पेपर में तुम्हारे कुल NTA स्कोर से साझा मेरिट सूची में तुम्हारा स्थान तय होता है। पात्र होने पर अपनी श्रेणी की सूची में भी तुम्हें एक रैंक मिलती है। कुल स्कोर बराबर हो तो बुलेटिन में दिए क्रम से विषयवार स्कोर और फिर उत्तरों के अनुपात देखे जाते हैं।

अंतिम अपडेट:

स्कोरकार्ड में पूरे देश की साझा सूची में अपना स्थान जानने के लिए CRL देखो। किसी आरक्षित सीट के लिए अपनी स्थिति समझनी हो तो उस सीट से जुड़ी सूची की रैंक पढ़ो। इंजीनियरिंग पेपर में कुल NTA स्कोर बराबर होने पर रैंक तय करने के लिए विषयों की तुलना एक खास क्रम में होती है।

स्कोर से सूची तक का रास्ता समझो

मान लो कि तुमने सुबह की पाली में इंजीनियरिंग का पेपर दिया और तुम्हारे सहपाठी ने दूसरी पाली में। गणना से निकले कच्चे अंक तुम्हारे अपने प्रश्नपत्र में प्रदर्शन बताते हैं। NTA के बुलेटिन के अनुसार हर पाली के अंकों को उस पाली के प्रदर्शन के सापेक्ष पर्सेंटाइल स्कोर में बदला जाता है। अपना कुल पर्सेंटाइल पढ़ते समय उसकी तुलना प्राप्त अंकों के प्रतिशत से करने पर दोनों का अर्थ बदल जाएगा। स्कोर और कच्चे अंकों का फर्क समझने के लिए अपनी अभ्यास कॉपी में अलग से लिखो कि तुमने किस प्रश्न पर कितने अंक कमाए।

एक ही इंजीनियरिंग पेपर के अलग सत्रों में बैठे हो तो दोनों सत्रों के कुल NTA स्कोर साथ देखो। बुलेटिन के अनुसार मेरिट के लिए दोनों में से बेहतर कुल स्कोर लिया जाता है। पहला गणित में अच्छा गया और दूसरा भौतिकी में, तो हर विषय का मनचाहा स्कोर लेकर नया कुल बनाने से तुम्हारे स्कोरकार्ड की रैंक समझ में आने के बजाय हिसाब किसी और परिणाम का बन जाएगा।

बराबर कुल पर गणित पहले क्यों खोलना है

मिसाल के लिए, दो उम्मीदवारों के अंतिम कुल NTA स्कोर बराबर हैं। एक का गणित का NTA स्कोर अधिक है और दूसरे का रसायन विज्ञान का। JEE Main के 2027 बुलेटिन में बीई और बीटेक पेपर के लिए पहले गणित, फिर भौतिकी और फिर रसायन विज्ञान का NTA स्कोर देखने का क्रम दिया है। इसलिए इस उदाहरण में गणित पर ही रैंक का क्रम तय हो जाता है। दूसरे उम्मीदवार का रसायन विज्ञान में अधिक स्कोर इस तुलना को पलटने का आधार तभी बनता, जब गणित और भौतिकी दोनों की तुलना में बराबरी बनी रहती।

अगर तीनों विषयों के NTA स्कोर भी बराबर हों तो बुलेटिन पूरे पेपर में गलत दिए गए उत्तरों और सही उत्तरों का अनुपात देखता है। कम अनुपात वाले उम्मीदवार को वरीयता मिलती है। यहाँ भी बराबरी हो तो वही तुलना गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान में बारी-बारी से होती है। आखिर तक सारे मानदंड बराबर रहें तो उम्मीदवारों को समान रैंक मिलती है। अपने पेपर की टाई सुलझाने वाली तालिका का शीर्षक पढ़ो। आर्किटेक्चर और प्लानिंग की अलग तालिकाएँ हैं। किसी दोस्त के दूसरे पेपर का क्रम अपनी गणना में लेने से नतीजा भटक सकता है।

अलग रैंक पढ़ते समय सीट की पंक्ति पहचानो

एक उम्मीदवार साझा सूची और अपनी श्रेणी की सूची में आ सकता है। साझा सूची में उसकी तुलना सभी पात्र श्रेणियों के उम्मीदवारों से होती है। श्रेणी की सूची में तुलना का समूह छोटा और अलग होता है। इसी वजह से एक ही उम्मीदवार के स्कोरकार्ड पर अलग सूचियों में अलग स्थान आ सकते हैं। अपने रिकॉर्ड में हर रैंक के ऊपर सूची का नाम भी लिखो। JoSAA के नियमों में अलग सूचियाँ और उनसे संबंधित सीट श्रेणियाँ दी गई हैं।

मान लो कि तुम्हारे सामने किसी एनआईटी की एक शाखा की ओपन सीट और ओबीसी-एनसीएल सीट की पंक्तियाँ हैं। दोनों पर संस्थान और कार्यक्रम का नाम मेल खाता है। पहली के लिए CRL और दूसरी के लिए अपनी ओबीसी-एनसीएल रैंक देखो। अपना पर्सेंटाइल दोनों पंक्तियों में लिख देने से तुलना की इकाई बदल जाती है। अगर बाद में कोई पुरानी तालिका दोबारा देखनी हो, तो साथ में राउंड, सीट श्रेणी और सूची का नाम लिखकर रखो। JoSAA का पोर्टल https://josaa.nic.in/ इसी आवंटन की जानकारी देता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पर्सेंटाइल ही मेरी AIR है?

पर्सेंटाइल अपनी पाली में सापेक्ष प्रदर्शन बताता है। AIR अंतिम मेरिट सूची में उम्मीदवार का स्थान बताती है।

गणित में आगे रहने पर बराबरी कब टूटती है?

इंजीनियरिंग पेपर में कुल NTA स्कोर बराबर होने पर गणित का NTA स्कोर पहले देखा जाता है।

ओपन सीट की रैंक किससे मिलाऊँ?

संबंधित परीक्षा की कॉमन रैंक लिस्ट से। आरक्षित सीट के लिए तालिका में लिखी श्रेणी की रैंक देखो।

अगर सारे मानदंड बराबर रह जाएँ तो?

यहाँ उद्धृत इंजीनियरिंग पेपर के बुलेटिन में अंतिम मानदंड पर भी बराबरी रहे तो समान रैंक देने का प्रावधान है।

आधिकारिक स्रोत

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