NEET में बराबर अंक आने पर रैंक कैसे तय होती है?
NEET UG में कुल अंक बराबर होने पर NTA उम्मीदवारों की रैंक तय करने के लिए पहले जीवविज्ञान, फिर रसायन विज्ञान और फिर भौतिकी में प्रदर्शन की तुलना करती है। बराबरी बनी रहे तो गलत और सही उत्तरों का अनुपात देखा जाता है। अपने परीक्षा सत्र के बुलेटिन से यह क्रम मिलाओ।
अंतिम अपडेट:
NEET UG में तुम्हारे और किसी दूसरे उम्मीदवार के कुल अंक बराबर हों, तो रैंक तय करने की शुरुआत जीवविज्ञान के प्रदर्शन से होती है। वहाँ बराबरी रहे तभी रसायन विज्ञान और फिर भौतिकी की बारी आती है। आखिरी फैसला जानने के लिए पहले यह देखो कि तुलना किस कदम तक पहुँची है।
बराबरी किस चीज़ की है?
NTA से मिले अपने स्कोरकार्ड से कुल अंक और अखिल भारतीय रैंक अलग लिखो। दोनों को समझने के लिए NEET स्कोरकार्ड की गाइड देख सकते हो। अंक बताते हैं कि उत्तरों के मूल्यांकन से कितना स्कोर बना। रैंक उम्मीदवारों के बीच तुम्हारा स्थान बताती है। किसी मित्र का कुल स्कोर तुम्हारे बराबर दिखे और रैंक अलग हो, तो कारण खोजने के लिए एक ही परीक्षा सत्र का बुलेटिन खोलो। NTA के 2026 बुलेटिन में यह क्रम मेरिट सूची के अध्याय में उम्मीदवारों की आपसी वरीयता वाले हिस्से में दिया है। अंग्रेज़ी में उसका शीर्षक Inter-se-merit है।
तुलना के लिए आधिकारिक परिणाम लो। उत्तर कुंजी से निकाला अनुमान अलग रखो। तुलना के लिए जारी स्कोरकार्ड के कुल अंक और अखिल भारतीय रैंक लिखो। किसी परिचित से रैंक का ज़िक्र हो तो वह किस सूची से है, यह भी पता करो। पूछो कि दोनों उम्मीदवार कुल अंक देख रहे हैं या किसी एक विषय का पर्सेंटाइल। फिर यह मिलाओ कि जिस रैंक की बात हो रही है वह अखिल भारतीय रैंक ही है। अलग सूचियों के स्थान साथ रखने पर टाई का नियम लगाने की शुरुआत ही गलत आधार से होगी।
पहले जीवविज्ञान को साथ पढ़ो
मान लो कि दो उम्मीदवारों के कुल अंक बराबर हैं। तुम्हारे जीवविज्ञान में अधिक अंक हैं और दूसरे उम्मीदवार के भौतिकी में अधिक। बुलेटिन के क्रम में वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान मिलकर जीवविज्ञान बनते हैं। इसलिए इस उदाहरण में वरीयता जीवविज्ञान की तुलना पर ही तय हो जाएगी। भौतिकी में बढ़त होने का असर तभी आता जब उससे पहले के मानदंडों से उम्मीदवार अलग न हुए होते।
अब उदाहरण में थोड़ा बदलाव करो। जीवविज्ञान बराबर है, लेकिन रसायन विज्ञान में दूसरे उम्मीदवार का प्रदर्शन बेहतर है। इस बार क्रम रसायन विज्ञान पर रुकेगा। अगर जीवविज्ञान और रसायन दोनों बराबर हैं, तो भौतिकी देखी जाएगी। इन मानदंडों की सूची को विषयवार बोनस अंकों की तरह पढ़ने से भ्रम होता है। तुलना से पहले जो कुल अंक थे, वे इस प्रक्रिया में उतने ही रहते हैं। फर्क उस स्थान में आता है जो सूची में एक उम्मीदवार को दूसरे के सापेक्ष मिलता है।
विषयों में भी बराबरी रहे तो उत्तरों की तुलना
उसी बुलेटिन में अगला मानदंड पूरे पेपर के लिए दिया गया है। जिन प्रश्नों के उत्तर दिए गए, उनमें गलत उत्तरों की संख्या और सही उत्तरों की संख्या का अनुपात देखा जाता है। कम अनुपात वाले उम्मीदवार को वरीयता मिलती है। अनुपात पढ़ते समय गलत उत्तरों के सामने सही उत्तर ही रखो। केवल गलतियों के कुल, कोशिश किए गए सभी प्रश्नों या खाली छोड़े गए प्रश्नों से तुलना करने पर बुलेटिन वाला मानदंड बदल जाएगा।
मसलन, तुम्हारी अभ्यास कॉपी पर एक सवाल के सामने काटा हुआ विकल्प है और दूसरे के सामने जगह खाली है। पहले सवाल पर जाँचो कि अंतिम उत्तर दर्ज हुआ था या वह केवल प्रश्नपुस्तिका पर लगी निशानी थी। जब दर्ज उत्तरों की सूची साफ होगी तभी गलत और सही उत्तरों का अनुपात निकलेगा। पूरे पेपर पर भी बराबरी रहे तो यही तुलना क्रम से जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान और भौतिकी में होती है। किसी भी चरण पर अंतर मिलते ही उसके बाद वाले चरण की ज़रूरत समाप्त हो जाती है।
अंतिम रैंक मिलने पर क्या संभालकर रखो
सभी शैक्षणिक मानदंडों के बाद भी बराबरी बची हो तो NTA की विवरणिका स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के मार्गदर्शन में यादृच्छिक प्रक्रिया बताती है। अपने अभ्यास के लिए तुम उत्तरों की तुलना कर सकते हो। वास्तविक आवेदन में जारी स्कोरकार्ड की अखिल भारतीय रैंक ही दर्ज करो। मेडिकल काउंसलिंग का पोर्टल चुनते समय अपनी रैंक के साथ कोटा और कोर्स का नाम भी लिखो। टाई का नियम रैंक का क्रम समझाता है। कॉलेज की सीट का फैसला उस काउंसलिंग की पात्रता, उपलब्ध सीटों और तुम्हारी पसंद के आधार पर आगे होता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जीवविज्ञान के लिए कौन से अंक देखे जाते हैं?
इस तुलना में वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान को मिलाकर जीवविज्ञान का प्रदर्शन देखा जाता है।
अगर किसी के भौतिकी में ज्यादा अंक हैं तो क्या उसे बेहतर रैंक मिलेगी?
भौतिकी की तुलना तभी होती है जब जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान की तुलना के बाद भी बराबरी बनी हो।
क्या गलत और छोड़े हुए उत्तर एक साथ गिने जाते हैं?
बुलेटिन का अनुपात दिए गए गलत उत्तरों और सही उत्तरों से बनता है। खाली छोड़ा गया प्रश्न इन दोनों से अलग है।
अंत तक बराबरी बनी रहे तो क्या होता है?
यहाँ उद्धृत बुलेटिन में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के मार्गदर्शन में यादृच्छिक प्रक्रिया का प्रावधान है।
आधिकारिक स्रोत
- NEET UG Information Bulletin · National Testing Agency · 2026

