JEE की रैंक सूची में टाई-ब्रेकिंग नियम
टाई-ब्रेकिंग नियम वह क्रम है जिसमें परीक्षा संस्था बराबर स्कोर वाले उम्मीदवारों की रैंक तय करने के लिए अतिरिक्त मानदंड देखती है। हर परीक्षा के अपने मानदंड होते हैं। JEE Advanced में कुल अंक बराबर होने पर सबसे पहले यह देखा जाता है कि सही उत्तरों से किसने अधिक अंक अर्जित किए।
अंतिम अपडेट:
टाई-ब्रेकिंग नियम समान स्कोर वाले उम्मीदवारों को रैंक देते समय तुलना करने का तय तरीका है। मान लो कि JEE Advanced की परीक्षा में नील और मीरा के कुल अंक बराबर हैं। मीरा ने सही उत्तरों से अधिक अंक अर्जित किए, लेकिन गलत उत्तरों पर उसके अधिक अंक भी कटे। दोनों का जोड़ बराबर होने के बावजूद सही उत्तरों से मिले अंकों के आधार पर मीरा को बेहतर रैंक मिलेगी।
इस उदाहरण में सही उत्तरों की गिनती और उनसे मिले अंक अलग बातें हैं। नतीजा समझते समय कुल अंक के साथ अपनी परीक्षा की विवरणिका में रैंक सूची वाला भाग पढ़ो। JEE Main के लिए उसके अपने पेपर का नियम देखो।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या इस प्रक्रिया में अतिरिक्त अंक मिलते हैं?
कुल अंक वही रहते हैं। तुलना का उद्देश्य रैंक सूची में उम्मीदवारों का स्थान तय करना है।
सही उत्तरों से मिले अंक भी बराबर हों तो क्या होता है?
JEE Advanced की विवरणिका में इसके बाद गणित और फिर भौतिकी के अंकों की तुलना का क्रम दिया गया है।
सभी मानदंडों पर बराबरी रहे तो क्या होगा?
JEE Advanced की विवरणिका ऐसे उम्मीदवारों को एक ही रैंक देने का प्रावधान रखती है।
आधिकारिक स्रोत
- JEE (Advanced) Information Brochure — Rank Lists · JEE (Advanced)

